पीएसएलवी उत्पादन
न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनसिल) संघ (कंसोर्टियम) मार्ग के अंतर्गत भारतीय उद्योग के माध्यम से पीएसएलवी उत्पादन करने के लिए नोडल एजेंसी होगी। उद्योग संघ जीओसीओ मॉडल के अंतर्गत इसरो की मौजूदा सुविधाओं का उपयोग करते हुए प्रक्षेपण यान के उत्पादन, संयोजन और समाकलन के लिए उत्तरदायी होगा।…
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ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) उत्पादन
न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनसिल) संघ (कंसोर्टियम) मार्ग के अंतर्गत भारतीय उद्योग के माध्यम से पीएसएलवी उत्पादन करने के लिए नोडल एजेंसी होगी। उद्योग संघ जीओसीओ मॉडल के अंतर्गत इसरो की मौजूदा सुविधाओं का उपयोग करते हुए प्रक्षेपण यान के उत्पादन, संयोजन और समाकलन के लिए उत्तरदायी होगा।
ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान के बारे में
ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) भारत का तीसरी पीढ़ी का प्रक्षेपण यान है। यह द्रव चरणों से सुसज्जित पहला भारतीय प्रक्षेपण यान है। अक्टूबर 1994 में अपने पहले सफल प्रक्षेपण के बाद, पीएसएलवी भारत के विश्वसनीय और बहुमुखी वर्कहॉर्स प्रक्षेपण यान के रूप में उभरा। जून 2019 तक पीएसएलवी ने 48 प्रक्षेपण किए हैं, जिनमें से 46 सफलतापूर्वक अपनी नियोजित कक्षाओं में पहुँचे। पीएसएलवी का उपयोग करते हुए इसरो ने 33 देशों के 297 ग्राहक उपग्रहों को निम्न भू-कक्षा में प्रक्षेपित किया है।
एलईओ में उपग्रह प्रक्षेपित करने के अतिरिक्त, पीएसएलवी ने संचार, मौसम विज्ञान, नौवहन, वैज्ञानिक प्रयोगों और अंतरिक्ष अन्वेषण मिशनों के लिए भी उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं।
पीएसएलवी ने दो अंतरिक्ष यानों, 2008 में चंद्रयान-1 और 2013 में मंगल कक्षित्र अंतरिक्ष यान, का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया, जो बाद में क्रमशः चंद्रमा और मंगल तक पहुँचे। इसने भारत की पहली अंतरिक्ष वेधशाला, एस्ट्रोसैट का भी प्रक्षेपण किया
इसरो अपनी वाणिज्यिक शाखा एनसिल के माध्यम से भारतीय उद्योगों द्वारा पीएसएलवी चरणों के उत्पादन की योजना बना रहा है।
यान विनिर्देश
| ऊँचाई | : | 44 मीटर |
| व्यास | : | 2.8 मीटर |
| चरणों की संख्या | : | 4 |
| लिफ्ट-ऑफ द्रव्यमान | : | 320 टन (XL) |
| प्रकार | : | 2 (पीएसएलवी-सीए, पीएसएलवी-एक्सएल) |
| प्रथम उड़ान | : | 20 सितंबर 1993 |
पीएसएलवी एक बहुमुखी यान है, जो उपग्रहों को एलईओ (निम्न झुकाव, एसएसओ), सब-जीटीओ (भू-तुल्यकालिक अंतरण कक्षा) और जीटीओ में प्रक्षेपित करने में सक्षम है।
एसएसपीओ तक पेलोड: 1,750 किग्रा
पीएसएलवी ने विभिन्न उपग्रहों, विशेषकर आईआरएस शृंखला के उपग्रहों, को निरंतर निम्न भू-कक्षाओं में पहुँचाकर 'इसरो का वर्कहॉर्स' उपाधि अर्जित की। यह 600 किमी ऊँचाई की सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षाओं तक 1,750 किग्रा पेलोड ले जा सकता है।
सब-जीटीओ तक पेलोड: 1,425 किग्रा
अपनी अद्वितीय विश्वसनीयता के कारण, पीएसएलवी का उपयोग आईआरएनएसएस समूह के उपग्रहों जैसे विभिन्न उपग्रहों को भू-तुल्यकालिक और भूस्थैतिक कक्षाओं में प्रक्षेपित करने के लिए भी किया गया है।